Long time ago
बहुत समय पहले जैसे मेरे लिए समय कहीं रूक गया था।
जब मैं एक परीकथा पढ़ रही थी।
परीकथा की एक डायन मेरे ख्वाबों में हर रात आया करती थी।एक रात एक शहज़ादा जब मेरे सपने में आया तब____
बहुत पहले
कितने पत्ते झड़े
समय ने कितने आँसू बहाए
मेरी दुनिया किसी गर्त में ओझल हो गयी
लेकिन मैं ___
अटकी रही वक़ की सुगनी पर
____कि मेरी नींद खुले
लेकिन नींद थी कि खुलती ही नहीं थी
और बोझिल पलकें लिये मैं साहिलों में भटक रही थी।

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