संदेश

हाँ, मैं जिंदा हूँ

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 यह कैसे सम्भव हो  सकता  है? ओ रात के  पहले  पहर की   ओसकण! मैं  दुनिया  की सबसे  सुखी इंसान  हूँ।  फिरभी  ये बूँद कैसी  जो मेरी आँखों  से ढलती है! रात  में  जब मैं  सोती हूँ तब कौन मेरी आत्मा  को निचोड़ कर मेरी देह से  निकाल लेता है? चाँदनी  रात  में  क्यों  संकड़ी गलियों  में  बेइंतिहा भटकती हूँ! सुबह  के धुंधलका में  ये कोहरा कैसा है जो हटने का  नाम  ही नहीं  लेता।

Whispering stone

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  'पत्थर बोलता है... उसकी भाषा को समझने के लिए...! कोई सफर तय नहीं करना पढ़ता...! बड़े जतन से... उसके करीब जाकर...! उसकी धड़कनों को...! अपनी धड़कनों  के सुर में- लय-ताल मिलाना पड़ता है। बहुत दर्द और रहस्यों को समटे हुए.. ये पत्थर खामोश तो होते हैं- लेकिन जिस दिन ... ये चीखते हैं... मच जाती है तबाही... हर तरफ...! और पलट जाते हैं...! इतिहास के पन्ने....!!

Silent

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मैं जितना वाचाल हूूँ उससे कहीं ज़्यादा ___  मैं जितनी मौन हूँ । जितना सघन उतनी सरल  वो नदी हूँ जो___ प्रथम दृष्टि में जितनी उथली  पानी में उतरने पर लगती उतनी ही गहरी

Long time ago

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 बहुत  समय पहले जैसे मेरे लिए  समय कहीं रूक गया था। जब मैं  एक परीकथा पढ़ रही थी। परीकथा की एक डायन मेरे ख्वाबों में हर रात आया करती थी।एक रात एक शहज़ादा जब मेरे सपने में आया तब____ बहुत पहले कितने पत्ते झड़े  समय ने कितने आँसू बहाए मेरी दुनिया किसी गर्त में ओझल हो गयी लेकिन मैं ___ अटकी रही वक़ की सुगनी पर ____कि मेरी नींद  खुले लेकिन नींद थी कि खुलती ही नहीं थी  और बोझिल पलकें लिये मैं साहिलों में भटक रही थी।   

Music

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"O music! A melody occurs to you; you sing it silently, inwardly only; you step your being in it; it takes posession of all your strength and emotions,  and during the time it lives in you, it effaced all that is fortuitous,  evil, coarse and sad in you; it brings  the world  into  harmony with  you,  it makes burdens light and gives  wings to depressed spirits." __Gertrude by Hermann Hess.

सागर

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चाँदनी रात  ___सागर में  ऊँची  ऊँची  लहरें  उठती  हैं।  लगता  है  ज़ोर से  तूफ़ान  आने  वाला है। लेकिन  जब सूर्योदय  हुआ तब लहरें  शांत थी। एक मछुआ दूसरे मछुआ  से  कहता  है ___ "बंधु! आज बहुत  दिनों  बाद आसमान  साफ़ नज़र आ रहा है। " दूसरा मछुआ  कहता  है___"हाँ साथी, समुद्र  का पानी भी गहरा नीला है। आज खूब मछलियां  मिलेंगी।" दोनों  मछुवे  खुश होकर  समुद्र  में  अपनी नाव खोल  देते  हैं। 

भ्रम

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हाँ,मैं  भ्रमित थी।  और एक  दलदल में  फँसती चली जा रही थी। हालांकि  तालाब  में  कितने कमल खिले थे। मेरा लक्ष्य  तालाब तक पहुँचने का था लेकिन कितने  कंकड़ पत्थर राह में  अटके पड़ थे। ऐसा भी होता है कि  हम  जिस आकर्षण  के  वशीभूत  किसी वस्तु  की ओर खींचे चले जाते हैं यह जाने बगैर  कि हमारे  सफ़र  का अंत दुखद भी हो सकता  है।  हम मैं  सूरज  को  देखती थी नित्य सुबह।मुझे  उससे  अंतहीन  प्यार  हो गया था यह जाने  बगैर कि उसका स्वभाव जलना जलाना है। मैं  अपने ही शब्दों क्रियाकलापों के मकड़जाल में  उलझती चली जाती  थी। मैं  रात भर अपने विचारों  की दुनिया  में  उलझती  रहती थी। रात में  सूरज  दिखता नहीं  और मैं  सुबह का इंतज़ार  करती रहती थी । सूरज नित्य  मुझे  देखता और जाते जाते हर शाम मुझे  एक सुनहरे चादर से लिपटा जाता था । और जबतक मैं  उस सुनहरे चादर का मर्म समझ  पात...